Ascend Telecom ग्रुप के CEO डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी जी ने परिवार के साथ प्रयागराज में त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई
महाकुम्भ, जो 144 वर्षों में एक बार आता है, और इस बार महासंयोग है। इसे खोने का ख्याल किसी के भी मन में नहीं आता। त्रिवेणी संगम, जहां गंगा, यमुना और सरस्वती नदियां मिलती हैं, यह स्थल विशेष आस्था का केंद्र बन है। इस पावन अवसर पर, Ascend Telecom ग्रुप के CEO डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी जी (V. S.S.M और I.T.S) ने अपने परिवार के साथ प्रयागराज आकर त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई।
बैंगलोर से प्रयागराज आकर, डॉ. चतुर्वेदी जी ने इस अद्वितीय अवसर का लाभ उठाते हुए त्रिवेणी संगम में स्नान किया, जो इस समय महाकुंभ के अंतर्गत हो रहा है। महाकुंभ का महत्व अत्यधिक है, और 144 वर्षों बाद यह संयोग बना है। इस अवसर पर, श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचे हैं ताकि इस दिव्य संगम में स्नान करके अपने जीवन को धन्य बना सकें।
डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी जी ने रात्रि में प्रयागराज पहुंचने के बाद, विश्राम के लिए Climosphere और लक्ष्य संस्था द्वारा लगाए गए टेंट में रुके। यह व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए अत्यधिक आरामदायक और सुविधाजनक थी। रात्रि विश्राम के बाद, अगले दिन सुबह वह VIP घाट पहुंचे और प्रशासन द्वारा संचालित नाव से त्रिवेणी संगम में स्नान किया।
अपने अनुभव को साझा करते हुए डॉ. चतुर्वेदी जी ने कहा, "यहां आकर त्रिवेणी संगम स्नान करके बहुत अच्छा लगा। यह स्थान न केवल धार्मिक रूप से पवित्र है, बल्कि यहां की आस्था और शांति ने मेरे दिल को छू लिया। इसके अलावा, Climosphere के सहयोग से और लक्ष्य संस्था द्वारा श्रद्धालुओं के रुकने और खाने की जो व्यवस्था की गई है, वह अत्यंत सुंदर है। हम इस कार्य की सराहना करते हैं और आशा करते हैं कि यह संस्था आगे भी इस तरह के कार्य करती रहे।"
डॉ. चतुर्वेदी जी का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि जब लोग साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो समाज के लिए इसका सकारात्मक प्रभाव होता है। इस बार महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में जो श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं, वह निश्चित ही उल्लेखनीय हैं।
इस अवसर पर Ascend Telecom ग्रुप के CEO डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी जी ने समाज की भलाई के लिए अपने योगदान को बढ़ाने की इच्छा जाहिर की। उनका यह कदम न केवल आस्था से जुड़ा है, बल्कि समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
इस यात्रा के माध्यम से डॉ. चतुर्वेदी जी ने यह साबित किया कि धार्मिक आस्थाएं और सामाजिक कार्य एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजन में इस प्रकार की भागीदारी से न केवल व्यक्ति की आस्था का पोषण होता है, बल्कि समाज में अच्छे कार्यों को भी बढ़ावा मिलता है।
अंत में, डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी जी ने सभी श्रद्धालुओं को महाकुंभ के इस विशेष अवसर पर आशीर्वाद दिया और उनके जीवन में सुख-शांति की कामना की। उनका यह अनुभव सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है, जो समाज सेवा और आस्था को समान रूप से महत्व देते हैं।